हजारो साल पुरानी सभ्यता अपनी दशा पे आंसू बहा रही है मगर इसके आंसू पोंछने वाला कोई नहीं है प्रस्तुत है गुलाम नबी की एक खास रिपोर्ट
समाज के लिए संवाद का सेतु बनने का प्रयास है मेरा | समाचार एवं संवाद संकलित कर सबके समक्ष लाना मेरा हेतु है I कोई भी आपस में रार -तकरार न करें | आपस में संवाद करें, सूचनाएं प्राप्त करे, सूचनाएं प्रसारित करें | इसी से बड़ी से बड़ी समस्या का हल हो सकता है | मेरे साथ आइये, संवाद सेतु बनिए! शायद हम मिलकर इस त्रस्त समाज को सुख के कुछ क्षण दे सकें | गुलाम नबी संवाददाता +919414095786
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रविवार, 14 मार्च 2010
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