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रविवार, 14 मार्च 2010

लाख-लाख रुपए के बकरे

आमजन के लिए आकर्षण का केन्‍द्र बने हुए हैं शौकत अली के बकरे
कुदरत के रंग भी निराले होते हैं और कई बार कुदरत ऐसे-ऐसे कारनामे करती है कि देख्‍ाने वाला हैरान रह जाता है। हनुमानगढ जिले के गांव रोडांवाली निवासी शौकत अली के घर पर बंधे बकरे भी ऐसी ही हैरानगी पैदा करने वाला विषय बने हुए हैं।
मुसलमान समुदाय के प्रसिद़ध त्‍यौहार बकरीद के नजदीक आते ही बकरीद के दिन कुर्बानी देने के लिए बकरों की खरीद फरोख्‍त का सिलसिला प्रारंभ हो गया है रोडांवाली गांव निवासी शौकत अली के घर पहुंच रहे खरीददारों को यहां पर एक नया तौहफा मिल रहा है और वो है गाय के आकार के विशालकाय बकरे। आम बकरों से कहीं ज्‍यादा बडे ये बकरे सभी के लिए कोतूहल का केन्‍द्र बने हुए हैं। इनमें से कई बकरों की लम्‍बाई तो साढे पांच फुट तक है और मोटाई की बात करें तो इनमें से कई बकरे 150 किलो से भी ज्‍यादा के हैं। ग्राहकों का मानना है कि इनमें से प्रत्‍येक बकरे से एक क्विंटल गौश्‍त प्राप्‍त हो सकता है।
शौकत अली के इन बकरों की कीमत प्रति बकरा सत्‍तर हजार तक लग चुकी है मगर शौकत अली अपनी इस अनमोल चीज को एक लाख से कम बेचने को तैयार ही नहीं है जिस कारण ग्राहक यहां से निराश लौट रहे हैं। इन बकरों को देखने के लिए जहां पंजाब, हरियाणा के अलावा राजस्‍थान के दूर दराज के क्षेत्रों से ग्राहक पहुंच रहे हैं तो ग्रामवासी भी इन बकरों को देखकर हैरान हैं। ग्रामीणों व यहां आने वाले ग्राहकों का मानना है कि उन्‍होने अपनी जिदंगी में इतने बडे-बडे बकरे नहीं देखे।
अब जबकि ये बकरे सभी के लिए आकर्षण का केन्‍द्र बने हुए हैं तो शौकत अली के लिए इन बकरों को पालना भी किसी समस्‍या से कम नहीं है। इनमें से प्रत्‍येक बकरा प्रतिदिन की खुराक में 5 किलो चने की दाल और 5 किलो दूध पी जाता है जिसके चलते शौकत अली को इनके पालन पौषण में भारी मशक्‍कत का सामना करना पड रहा है।
अब इसे कुदरत का करिश्‍मा कहें या शौकत अली की अथक मेहनत का परिणाम की ये बकरे सभी के आकर्षण का केन्‍द्र बने हुए हैं। बकरीद के त्‍यौहार के मद़देनजर शौकत अली के घर पहुंच रहे ग्राहक निराश लौट रहे हैं तो साथ ही वे एक नई अनुभूति भी प्राप्‍त कर रहे हैं।
हनुमानगढ से गुलाम नबी की विशेष रिपोर्ट।

1 टिप्पणी:

  1. वाह गुलाम भाई,
    आपरो ब्लॉग देख'र जीवसोरो होग्यो। म्हारै हिवड़ै री कळी-कळी खिलगी। भोत प्यारो लिखो हो आप। आपरी रिपोर्टां बांच-देख'र घणो हरख होयो।
    -सत्यनारायण सोनी, (प्राध्यापक-हिन्दी)
    राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, परलीका।

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